गीता दत्त (Geeta Dutt) के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कभी दिखावा नहीं किया, ना ही कभी खुद का या अपनी आवाज का प्रचार किया. वो एक लाल रॉबिन पक्षी जैसी थीं जो अपने लिए गाकर ही खुश रहता है, जो वसंत के आने की सूचना देता है, जो गर्माहट का आभास कराता है.

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