नसीरुद्दीन शाह की अदाकारी के बारे में किसी को शक नहीं. उन्होंने 'निशांत' फिल्म से साल 1975 में सिनेमा में कदम रखा और 'स्पर्श', 'आक्रोश 'और 'बाजार' जैसी यादगार फिल्में दी हैं. 'जाने भी दो यारों' और 'मासूम' फिल्मों में अलग-अलग भूमिका से अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया, लेकिन उनके बयान कई बार विवादों का कारण बने.
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